Fundamental Mathematics
(बेसिक गणित)
Highlight
प्राकृतिक संख्या (natural number),
पूर्ण संख्या (Whole number),
ऋण संख्या (Negative number),
धन संख्या (Positive number),
सम संख्या (Even number),
विषम संख्या (Odd number),
भाज्य संख्या (Composite number),
अभाज्य संख्या (Prime number),
पूर्णांक संख्या (Integer number),
भिन्न संख्या (Fraction number),
परिमेय संख्या (Rational number),
अपरिमेय संख्या(Irrational number),
वास्तविक संख्या (Real number),
अवास्तविक संख्या (unreal number ,imaginary number),
इससे पहले अध्याय में अंक और संख्या क्या होता है इसके बारे में जान चुके हैं ।
आज के अध्याय में बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ के बारे में अध्ययन करेंगे । बेसिक गणित का सभी अध्याय बहुत ही महत्वपूर्ण है ।
1.प्राकृतिक संख्या (natural number)
जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि "प्रकृति"
1,2,3,4,5,6,7,8,9 इन संख्याओं को प्राकृतिक संख्या कहा जाता है ।
इसके बाद जो संख्या आता है जैसे 10,11,12 … इन संख्याओं को भी प्राकृतिक संख्या ही कहा जाता है । क्योंकि ये संख्या भी 1 से लेकर 9 तक की संख्याओं से मिलकर बनाई गई है ।
वैसे 0 को प्राकृतिक संख्या नहीं कहा जाता है ।
दो क्रमागत प्राकृतिक संख्या अगर बोला जाए लिखने को तो । अगर पहली संख्या x है तो अगली संख्या x+1 इसके बाद वाली संख्या x+1+1 ….
x=x+0
x+1=x+1
x+1+1=x+2
x+1+1+1=x+3
x+1+1+1+1=x+4
x+1+1+1+1+1=x+5
x+1+1+1+1+1+1=x+6
x+1+1+1+1+1+1+1=x+7
x+1+1+1+1+1+1+1+1=x+8
x+1+1+1+1+1+1+1+1+1=x+9
2.पूर्ण संख्या (Whole number)
ये भी नाम से ही स्पष्ट है । "पूर्ण " यानी पूरा , प्राकृतिक संख्या 1 से शुरू होता है । लेकिन जब 0 से शुरू किया जाए तो वह पूर्ण संख्या बन जाता है ।
जब "0" का अविष्कार हुआ तब से संख्या लिखने में बहुत ही आसानी हुई। मतलब एक संख्या का सेट बन गया (0,1,2,3,4,....) शायद इसी कारण इस नई संख्या के सेट को "पूर्ण संख्या" कहा गया ।
3.ऋण संख्या (Negative number)
ऋण संख्या के बारे में बताने की जरूरत नहीं है । एक ऐसी संख्या का सेट जिसमें सिर्फ ऋण वाली संख्या ही हो ।
जैसे :- -1,-2,-3,-4,-5,-6,-7,-8…..
यहाँ ऋण का कॉन्सेप्ट कर्ज से है ।
मतलब किसी आदमी के पास अगर -1 रुपैया है तो यहाँ समझा जाएगा । उस आदमी के पास एक रुपैया कर्ज है । जब यह आदमी 100 रुपैया कहीं से मजदूरी कर के लाएगा । तो उसके पास 99 रुपैया ही होगा क्योंकि 1 रुपैया वह कर्ज वाले को दे दिया ।
इसी तरह अगर किसी आदमी के पास अगर -2 रुपैया है और यह भी मजदूरी कर के 100 रुपैया लाया तो इसके पास 98 रुपैया ही होगा ।
क्या आप बता सकते हैं कि -1 बड़ा है या -2 ?
अगर समझ में नहीं आया तो ऊपर के उदाहरण को एक बार फिर से पढ़िए ।
4. धन संख्या (Positive number)
धन संख्या जैसे 1,2,3,4,5…. ये धन संख्या कहलाता है । अगर कोई संख्या धन संख्या होता है तो उस संख्या से पहले + का चिह्न नहीं लगता है । जब ऋण संख्या होता है तो उस संख्या से पहले - का चिह्न लगता है ।
5. सम संख्या (Even number)
सम संख्या यहाँ भी नाम से ही स्पष्ट है । सम का मतलब बराबर होता है । सम संख्या पहचानने का कुछ नियम है ।
जैसे वो संख्या जिसमें 2 से भाग देने पर पूरा -पूरा विभाजित हो जाये ।
जैसे 0÷2=0, 2÷2=1, 4÷2=2, 6÷2=3, …
जब किसी संख्या को दो बराबर भागों में आसानी से बाँटा जा सके वह संख्या सम संख्या कहलाता है ।
जैसे 0=0|0, 2=1|1, 4=2|2, 6=3|3, 8=4|4, 10=5|5
जब किसी संख्या के अंतिम अंक 0,2,4,6 या 8 रहे तो वह सम संख्या कहलाता है ।
जैसे 502 ये सम संख्या है क्योंकि संख्या 502 में अंतिम अंक 2 है ।
इसलिए 0,2,4,6,8,10,12,14,16,18,20....
ये संख्याएं सम संख्याएं कहलाती है ।
दो क्रमागत सम संख्या निकलना भी आसान है ।
जैसे पहली सम संख्या x है । तो अगली सम संख्या x+2 होगा । इसके बाद वाली सम संख्या x+4 होगा ।
x=x+0
x+2=x+2
x+2+2=x+4
x+2+2+2=x+6
x+2+2+2+2=x+8
x+2+2+2+2+2=x+10
x+2+2+2+2+2+2=x+12
x+2+2+2+2+2+2+2=x+14
x+2+2+2+2+2+2+2+2=x+16
x+2+2+2+2+2+2+2+2+2=x+18
6. विषम संख्या (Odd number)
विषम संख्या सम संख्या का बिल्कुल उल्टा होता है । जिस संख्या का जोड़ा न लगाई जा सके उसे विषम संख्या कहा जाता है ।
जैसे 1,3,5,7,9,11,13,15,17,19…
नोट:- 0 विषम संख्या नहीं होता है । 0 सम है ।
दो क्रमागत विषम संख्या निकलना भी आसन है । अगर पहली विषम संख्या x है तो दूसरी विषम संख्या x+2 होगा । तीसरी विषम संख्या x+4 होगा ।
ये सम संख्या के जैसे ही है । लेकिन यहाँ x विषम संख्या है ।
7.भाज्य संख्या (Composite number)
भाज्य संख्या उस संख्या को कहते है जिसका गुणनखंड तीन या तीन से अधिक हो ।
या ऐसी संख्या जो स्वयं तथा 1 को छोड़कर दूसरे संख्या से विभाजित हो जाये उसे भाज्य संख्या कहते हैं।
जैसे : संख्या 2 , यहाँ 2 के पास सिर्फ दो ही गुणनखंड है ।
2-1,2 इसलिए ये भाज्य संख्या नहीं है ।
3-1,3 इसलिए ये भाज्य संख्या नहीं है ।
4-1,2,4 ये भाज्य संख्या है ।
8.अभाज्य संख्या (Prime number)
अभाज्य संख्या भाज्य का बिल्कुल उल्टा होता है । जिस संख्या का सिर्फ दो गुणनखंड हो । मतलब वैसी संख्या जिसको सिर्फ दो संख्या ही विभाजित करता है ।
जैसे :5 विभाजित सिर्फ 1 और 5 से ही होगा । कोई और दूसरे संख्या से विभाजित नहीं होगा । इसलिए 5 अभाज्य संख्या होगा ।
2,3,5,7,11,13,17,19,23,29,31,37,41,
43,47,51,53,57,59,61,67,71,73,79, 83,87,89,97,.....
ये सब अभाज्य संख्या हैं ।
-2 सबसे छोटी सिर्फ एक ही सम अभाज्य संख्या है ।
9.पूर्णांक संख्या (Integer number)
पूर्णांक संख्या में सभी संख्या समाहित हो जाता है । सभी ऋणात्मक संख्या और धनात्मक संख्या और शून्य ।
जैसे ….. -3,-2,-1,0,1,2,3,4,5,6……ये संख्याएं पूर्णांक संख्या कहलाती है ।
10. भिन्न संख्या (Fraction number)
भिन्न संख्या क्या होता है । ये बहुत ही सिंपल है । जैसे : 5÷2 इसको 5/2 भी लिख सकते हैं । ये 5/2 भिन्न संख्या कहलायेगा ।
⅔ ,⅘, 1/5, 9/10, इत्यादि भिन्न संख्या कहलाता है ।
11.परिमेय संख्या (Rational number)
परिमेय संख्या बहुत ही महत्वपूर्ण संख्या होता है । परिमेय संख्या का परिभाषा भी बहुत ही सिंपल है ।
वैसी पूर्णांक संख्या जो p/q के रूप में हो और q =0 नहीं होना चाहिए । ये p और q पूर्णांक संख्या है ।
जैसे:- ⅚,6/7 ये सब परिमेय संख्या कहलाता है ।
0 ,1, 2,-5,-4 ये सभी संख्या भी परिमेय संख्या है । क्योंकि इन सभी संख्याओं को भी p/q के रूप में लिखा जा सकता है । जैसे 0/1,1/1,2/1,-5/1,-4/1 इसलिए ये संख्या भी परिमेय संख्या कहलाता है ।
12.अपरिमेय संख्या(Irrational number)
जो संख्या परिमेय संख्या नहीं है वह अपरिमेय संख्या होता है । अपरिमेय संख्या को औपचारिक रूप से p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता है ।
जैसे:- 22/7 ये देखने में परिमेय संख्या लगता है लेकिन ये अपरिमेय संख्या है । आखिर क्यों है ये अपरिमेय ?
जब किसी संख्या से भाग दिया जाता है और वह सांत दशमलव होता है तो वह परिमेय संख्या कहलाता है । अगर वह असांत दशमलव होता है तो वह अपरिमेय संख्या कहलाता है ।
√2,√3… ये सब संख्या भी अपरिमेय कहलाता है । क्योंकि अगर रुट (√)को तोड़ियेगा तो असांत दशमलव में होगा ।
13. वास्तविक संख्या (Real number)
वास्तविक संख्या सभी परिमेय और अपरिमेय संख्या को कहा जाता है ।
14. अवास्तविक संख्या (unreal number , imagery number)
अगर आप higher studies कर रहें हैं तो आप अवास्तविक संख्या को जान सकते हैं । नहीं तो उतना जरूरी नहीं है ।
इसका परिभाषा भी अजीब है कोई भी संख्या अगर वास्तविक संख्या नहीं है तो वह अवास्तविक संख्या कहलाता है ।
जैसे :√-4 ये संख्या अवास्तविक संख्या कहलायेगा ।
√-4=√-1×2×2=2√-1 यहां √-1 imagery number कहलायेगा । √-1 को i लिखा जाता है ।
जैसे:2√-1=2i
Ranjan Kumar Singh

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