कृष्ण जन्माष्टमी पूजा करने की विधि
30 अगस्त को कृष्ण का जन्म होगा वह भी 12:00 बजे रात में उससे पहले 29 अगस्त को स्नान करके पूजा करना है ।
जो कि यह पहली दिन का पूजा होता है और इस पूजा में भी बहुत नियम निष्ठा से एवं भोजन किया जाता है । उसके बाद अगले दिन का पूजा जो कि 30 अगस्त को होगा वह मीन पूजा होता है सुबह 3:00 बजे से पहले आप भोजन करना चाहते हैं तो दही चुरा मीठा कोई भी चीज भोजन कर सकते हैं। उसके बाद भोजन नहीं करना होता है सुबह के बाद 12:00 बजे रात तक उपवास करना पड़ता है । और सुबह से शाम तक कृष्ण का पूजा भी किया जाता है । जिसमें कृष्ण को झूला भी झूला जाता है और बहुत सारे चीज क्या जाता है और रात 12:00 बजे पूजा विधि विधान से होता है। उसके बाद 12:00 बजे के बाद कृष्ण का भोग लगता है । भोग लगाने के बाद आप उपवास तोड़ सकते हैं ।31 अगस्त सुबह विधि विधान से कृष्ण का पूजा करके आप अपना व्रत तोड़ सकते हैं यह है।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा की साम्रगी
पूजन सामग्री की बात करें तो सबसे इंर्पोटेंट फल होता है इसमें खीरा जिसका यूज़ किया ही जाता है उसके बाद पीले रंग का सांप कपड़ा जहाज दूध एक साफ चौकी रहना चाहिए पंचामृत बनाने के लिए उसके बाद गंगाजल और बाल कृष्ण की मूर्ति चंदन धूप दीपक अगरबत्ती अक्षत मखन मिश्री तुलसी का पत्ता और भोग सामग्री ।
कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है
कृष्ण जन्माष्टमी मनाने का एक ही कारण है कि स्थिति को जो कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह तिथि होता है श्री कृष्ण का जन्म हुआ था वह भी 12:00 बजे रात को इसलिए 12:00 बजे रात को भोग लगाया जाता है यह माना जाता है कि 12:00 बजे रात को कृष्ण का जन्म हो गया है तो उसके बाद हम व्रत को तोड़ सकते हैं।
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